हल्लो दोस्तों Vachan Kise Kahate Hain के इस नए आलेख के लिए Soch101 में आप सभी का स्वागत है। आज हम हिंदी व्याकरण के महत्त्वपूर्ण अध्यायों में से एक Vachan Kise Kahate Hain पर चर्चा करेंगे।
वचन को विस्तृत रूप से समझने के लिए हम इसके अंतर्गत उन सभी बिंदुओं पर भी चर्चा करेंगे जिससे आपकी जानकारी में व्यापकता आये। जैसे :- वचन का अर्थ, Vachan Kise Kahate Hain | परिभाषा, भेद एवं परिवर्तन के नियम आदि।
Vachan Kise Kahate Hain आलेख के चर्चा में अंत तक बने रहने पर आप वचन से सम्बंधित उन सभी प्रश्नों के उत्तर को आसानी से जान पाएंगे जो अक्सर आपको परेशान करते आया है।
वचन काअर्थ | Vachan ka Arth
वचन जिसका अर्थ होता है – किसी से अपनी बात कहना परन्तु वहीँ वचन का शाब्दिक अर्थ होता है संख्या वचन। जैसेकि आप जानते ही हैं कि मनुष्य एक सामाजिक प्राणी है और समाज में रहने के कारण वे हमारे दिनचर्या में कहीं कहीं कोई न कोई संख्या उसमे अवश्य ही छिपी रहती है। हमारी पूरे दिनचर्या बिना संख्या का प्रयोग किये समाप्त हो ही नहीं सकता है।
वचन का परिभाषा | Vachan ki Paribhasha
शब्द के जिस रूप से संख्या के एक या एक से अधिक होने का बोध हो हिंदी व्याकरण में उसे ‘वचन’ कहा जाता है।
यदि आप दूसरे शब्दों में देखें तो – संज्ञा ,सर्वनाम ,विशेषण और क्रिया के जिस रूप से किसी संख्या का बोध कराया जाय वह हिंदी व्याकरण में ‘वचन’ कहलाता है। अर्थात जब कभी आपको किसी व्यक्ति, प्राणी अथवा वस्तु का एक या एक से अधिक होने का बोध कराता हो.
चाहे दिनचर्या कि बात हो या फिर नौकरी पेशा की हम सब अपने विचारों की अभिव्यक्ति के दौरान वचन का प्रयोग करते ही हैं.आपके व्यक्तित्व को निखारने में जितना भूमिका वेश भूषा का होता है उतना ही आपके भाषा शैली की भी है। आपके भाषा शैली में सबसे अधिक भूमिका व्याकरण का होता है। व्याकरण में कई अध्याय भी रहेंगे और उन सबका अपना महत्त्व है जिसमें से वचन भी है।
वचन के भेद | Vachan ke Bhed
प्राचीन काल या वैदिक काल की भाषा संस्कृत को माना जाता है क्योंकि आरम्भ में जितने भी भारतीय धर्मग्रन्थ लिखे गये हैं वे सारे संस्कृत में ही लिखा गया है।
इसलिए संस्कृत को सिर्फ भाषा ही नहीं बल्कि संस्कृति, विज्ञान, तार्किक क्षमता और अन्य भाषाओं का प्राण भी माना जाता रहा है क्योंकि हिंदी भाषा की उत्पत्ति संस्कृत से माना जाता है इसलिए हिंदी को संस्कृत की पुत्री भी कही जाती है।
अब यदि व्याकरण की दृष्टि से वचन की बात करें तो संस्कृत में तीन वचन होते हैं:- एकवचन, द्विवचन एवं बहुवच। परन्तु अंग्रेजी भाषा की तरह हिंदी में दो ही वचन होते हैं :- एकवचन और बहुवचन। हिंदी व्याकरण में द्विवचन का प्रयोग नहीं होता है।
एकवचन(Singular Noun)
जिस विकारी शब्द से किसी एक वस्तु अथवा व्यक्ति का बोध कराता हो उसे एकवचन कहा जाता है।उदहारण स्वरूप: लड़की, किताब, नदी, पुस्तक आदि।
बहुवचन (Plural Noun)
जिस विकारी शब्द से दो या दो से अधिक वस्तु अथवा व्यक्ति का बोध हो उसे बहुवचन कहा जाता है।
उदाहरण स्वरूप :– खिलौने, पुस्तकें , लड़किया , मछलियां आदि।
एकवचन और बहुवचन का उदाहरण निम्नलिखित है :–
एकवचन (Singular) | बहुवचन(Plural) |
लड़की खेल रही है। | लड़कियां खेल रही है। |
पुस्तक फट गयी। | पुस्तकें फट गयी। |
लड़की मैदान में खेल रही है। | लड़कियां मैदान में खेल रही है। |
ध्यान रखने योग्य महत्त्वपूर्ण बातें अथवा वचन को पहचानने का नियम कुछ इस प्रकार है:—
एकवचन के स्थान पर बहुवचन का प्रयोग:–
1) हम जब कभी आदरणीय व् सम्माननीय व्यक्ति को सम्बोधित करते हैं तो वहां सदैव एकवचन के स्थान पर बहुवचन का प्रयोग किया जाता है। जैसे :–
१) कल पिता जी आएंगे।
२) शिक्षक कक्षा में आ रहे हैं।
३) चाचा जी बैठे हैं।
2) सम्बन्ध और रिश्तेदारों को सम्बोधित करने वाले संज्ञाएँ सदैव एकवचन और बहुवचन दोनों में एक जैसे ही प्रयुक्त होते है। जैसे नाना, मामा, चाचा, दादा आदि अविकारी शब्द है।
एकवचन के रूप में :– बहुवचन केरूप में :–
१) मैं तुम्हारा दादा हूँ। १) राम और श्याम चाचा हैं .
२) रमेश तुम्हारा चाचा है। २) श्याम और हरि के नाना आए है।
कभी कभी लोग बड़प्पन दिखने के लिए मैं के स्थान पर ‘हम’ और वह के स्थान पर ‘वे’ का प्रयोग करते हैं।
१) मेरी बात सुनिए — हमारी बात सुनिए।
२) वह मेरा घर आया था — वे मेरे घर आये थे।
3) द्रव्यसूचक संज्ञाएँ सदैव एकवचन में ही प्रयोग किया जाता है।
जैसे :– पानी, घी, तेल,दूध, दही आदि।
4) अपवादस्वरूप कुछ शब्द सदैव ही बहुवचन में प्रयोग किया जाता है।
जैसे :– दाम , दर्शन , अक्षत , प्राण, आंसू ,जनता , हस्ताक्षर, भाग्य, समाचार,आशीर्वाद आदि।
बहुवचन के स्थान पर एकवचन का प्रयोग:–
वर्ग, वृंद, दल, गण, जाति आदि शब्द अनेकने ता को प्रकट करने वा ले हैं, किन्तु इनका व्यवहार एकवचन के समान होता है।
(i) स्त्री जाती सहनशील होती है।
(ii) सोना बहुमूल्य वस्तु है।
(iii) सैनि क दल शत्रु का दमन कर रहा है।
तू एकवचन है जिसका बहुवचन है तुम किन्तु सभ्य लोग आजकल लोक-व्यवहार में एकवचन के लिए तुम का ही प्रयोग करते हैं।
- मित्र, तुम कब आए।
- क्या तुमने खाना खा लिया ।
एकवचन से बहुवचन बनाने के नियम :
- जब आकारान्त के पुल्लिंग शब्दों में आ की जगह पर ए लगा दिया जाता है।
एकवचन = बहुवचन के उदहारण इस प्रकार हैं :-
(i) बेटा – बेटे
(ii) कुत्ता – कुत्ते
(iii) जूता – जूते
(iv) मोटा – मोटे
2. जब अकारांत के स्त्रीलिंग शब्दों में अ की जगह पर ऐं लगा दिया जाता है।
एकवचन = बहुवचन के उदहारण इस प्रकार हैं:–
(i) बात = बातें
(ii) बहन = बहनें
(iii) गाय = गायें
(iv) रात = रातें
जब आकारान्त के स्त्रीलिंग शब्दों में आ की जगह पर ऍ कर दि या जाता है।
(i) अध्यापिका = अध्यापिकाएँ
(ii) कन्या = कन्याएँ
(iii) माता = माताएँ
3.जब स्त्रीलिंग के शब्दों में या की जगह पर याँ लगा दि या जाता है।
- गुडि या = गुड़ियाँ
- चुहि या = चुहियाँ
- बुढि या = बुढियाँ
- लुटि या = लुटियाँ
4.जब इकारांत और ईकारांत के स्त्रीलिंग शब्दों याँ लगा कर ई को इ कर दि या जाता है।
(i) थाली – थालियां
(ii) रीती – रीतियां
(iii) नदी – नदियां
5.जब उ , ऊ ,आ , अ , इ , ई और औ की जगह पर ऍ कर दि या जाता है और ऊ को उ में बदल दिया जाता है।
(i) बहु = बहुएँ
(ii) वधू = वधुएँ
(iii) गऊ = गउए
जब एकवचन और बहुवचन दोनों में शब्द एक समान होते हैं।
एकवचन = बहुवचन के उदहा रण इस प्रकार हैं :-
राजा = राजा
नेता = नेता
क्षमा = क्षमा
प्रेम = प्रेम
बाजार = बाजार
जल = जल
विभक्ति सहित संज्ञा के शब्दों के नियम:
१) एकवचन से बहुवचन बनाने के लिए विभक्ति सहित अकारांत / आकारांत / उकारांत / ऊकारांत संज्ञा शब्दों के साथ ‘ओं’ का प्रयोग किया जाता है।
जैसे :- पत्ता – पत्तों
गमला – गमलों
घड़ा – घड़ों
२) विभक्ति सहित इकारांत व ईकारांत संज्ञा शब्दों को एक वचन से बहुवचन रूप बनाते समय इकारांत एवं ईकारांत के साथ ‘यों’ जोड़कर, ईकारांत की मात्रा को लघु कर देते हैं।
जैसे :- लाठी – लाठियों
स्त्री – स्त्रियों
लड़की – लड़कियों
वचन जिसका अर्थ होता है – किसी से अपनी बात कहना परन्तु वहीँ वचन का शाब्दिक अर्थ होता है संख्या वचन।जो आपको किसी संख्या के प्रयोग करने का बोध कराता है।
विभिन्न भाषाओँ में वचन के भेद भी अलग -अलग माना गया है परन्तु अंग्रेजी भाषा की तरह हिंदी व्याकरण में वचन के दो भेद को बताया गया है। एकवचन और बहुवचन। जब किसी एक वस्तु, व्यक्ति अथवा प्राणी का बोह हो तब एकवचन कहलाता है। परन्तु जब दो या दो से अधिक वस्तु, व्यक्ति अथवा प्राणी का बोध करात हो तब वह बहन कहलाता है।
निष्कर्ष :– मुझे आशा है आपको यह आलेख पसंद आया होगा जिसमें हमने आपके लिए हिंदी व्याकरण का एक महत्त्वपूर्ण अध्याय वचन का सविस्तार से जिसमें वचन का अर्थ, परिभाषा , भेद एवं वचन परिवर्तन के नियमों को बताने की कोशिश की। आपको यह आलेख पढ़कर कैसा लगा अपना महत्त्वपूर्ण टिप्पणी छोड़ सकते हैं जिससे अगले आलेख में हम आपके लिए कुछ और बेहतर पोस्ट कर सकें।