बुरे वक्त का भला पहलू जिसे आप ने कभी सोचा नहीं

इसे ध्यान से पढ़े, शायद आज के बाद समय को देखने का आपका नजरिया ही बदल जाय ! “जिंदगी में बुरा वक़्त कभी नहीं आता! सिर्फ दो तरह का वक्त आता है, एक – अनुकूल वक्त और दूसरा- प्रतिकूल वक्त ! अनुकूल वक्त को हम ‘अच्छा समय’ कहते हैं! प्रतिकूल वक्त को हम ‘बुरा समय … Read more

छू जाने वाली घटनाएं (incidents) जो कहती हैं कि आप पूर्वाग्रह में न फंसे

ये वो कुछ चुनिंदा घटनाएं हैं जो घटित होते समय मामूली दिख रही थीं लेकिन वे सारे वैश्विक अर्थब्यवस्था को नए आयाम देने वाले साबित हुए. दो घटनाओं (incidents) के साथ शुरू: 1. याहू ने Google को मना कर दिया 2. नोकिया ने Android को मना कर दिया नैतिक शिक्षा: 1. समय के साथ खुद … Read more

T20 में भारतीय टीम की जीत पर राजनीतिक पार्टियों की प्रतिक्रिया

भारतीय टीम ने ऑस्ट्रेलिया मे ऑस्ट्रेलिया को हराकर टेस्ट और द्विपक्षीय T20 श्रृंखला जीती .. इस जीत पर विभिन्न दलों की राय इस प्रकार हो सकती हैं .. भाजपा:- सभी जातियों और धर्म के खिलाड़ियों ने मिलकर देश को गौरव के क्षण प्रदान किये। ये जीत “सबका साथ सबका विश्वास” की जीत हैं। भारत का … Read more

भगत सिंह के जीवन से सम्बंधित घटनाएं जो आज के युवा पीढ़ी को प्रेरणा देती है।

हम सबको बचपन से ही अक्सर सुनने को मिलता है “होनहार बिरवान के होत चिकने पात।” ये लोकक्तियाँ सरदार भगत सिंह के लिए पूरी  तरह से सार्थक साबित होता है। क्योंकि भगत सिंह जब बाल अवस्था में अपने मित्रों के साथ खेलते थे तब अपने साथी समूहों को दो टोली में बाँट देते  थे और दोनों पक्ष … Read more

प्रथम स्वतंत्रता संग्राम(1857 ई) को लेकर विभिन्न विद्वानों का मत

स्वतंत्रता संग्राम का उदय – प्राचीन काल से ही भारत के लोगों में एक धारणा बनी हुई है – “वसुधैव कुटुम्कम्ब “और  “अतिथि देवो भवा ” वैदिक काल में प्रत्येक कार्य को धर्म से जोड़कर किया जाता था यही वजह था जब अंग्रेज व्यापार करने के लिए भारत आये तो उसे यहाँ रुकने से मना नहीं कर पाए क्योंकि … Read more

Agar Bhagat Singh ko Fansi Nahi Hoti to Kya Hota?

दुर्भाग्य से भगत सिंह को बहुत कम उम्र में फांसी मिली. परन्तु आज के भारतीय स्वाभाविक रूप से यह कल्पना करना चाहेंगे की अगर उन्हें साजिश के तहत “केंद्रीय अस्सेम्ब्ली बम केस” में फसाया नहीं जाता और वो जीवित रहकर स्वतंत्रता की लड़ाई को आगे बढ़ाते तो क्या होता?   हमने इतिहास को फिर से पढ़ा … Read more