हल्लो दोस्तों आज के नए आलेख Karak Kise Kahate Hain के लिए Soch101 में आपका स्वागत है। दोस्तों आप किसी भी भाषा में पढ़िए या बोलिये इसके लिए आपको व्याकरण | Grammer को जानना जरुरी है।
Soch101 आपके लिए हिंदी व्याकरण के एक महत्त्पूर्ण टॉपिक Karak Kise Kahate Hain को लेकर आया है जो स्कूल, कॉलेज से लेकर प्रतियोगिता परीक्षा की तैयारी करने वाले सभी विद्यार्थियों के लिए महत्त्वपूर्ण टॉपिक है।
आज के आलेख कारक किसे कहते के अंतर्गत हम कई छोटे बड़े बिंदुओं की चर्चा करेंगे। जिससे आप कारक टॉपिक को सम्पूर्ण रूप से समझ पाएंगे। जैसे :- कारक के अर्थ , Karak Kise Kahate Hain | परिभाषा,कारक के भेद और उदाहरण।
कारक का अर्थ | Karak ka Arth
कारक शब्द में ‘कृ’ धातु के साथ ‘अक’ प्रत्यय के जुड़ने से बना है जिसका शाब्दिक अर्थ है ‘करने वाला’। इसके साथ ही साथ कारक को क्रिया का निष्पादक तथा क्रिया का जनक के नाम से भी जाना जाता है।
ये तो आप मानते ही हैं की किसी भी वस्तु अथवा व्यक्ति के अस्तित्व होने के लिए किसी न किसी से उसका सम्बन्ध अवश्य ही होता है। जैसे हम मनुष्यों का सम्बन्ध सर्वप्रथम हमारे माता पिता से होता है ठीक वैसे ही क्रिया का अन्य शब्दों के साथ सम्बन्ध जोड़ने के लिए कारक जनक के रूप में कार्य करता है।
कारक के अर्थ से तो आप समझ ही चुके हैं कि करने वाला कारक है। अब ये प्रश्न भी आपके मष्तिस्क में अवश्य ही आया होगा कि क्या करने वाला तो समझिये की किसी कार्य का सम्पादन करने में मुख्य भूमिका निभाने वाला व्यक्ति ही कारक होता है।
कारक की परिभाषा |Karak ki Paribhasha
जब कभी भी आप किसी वाक्य को लिखते हैं और उसके अंतर्गत कोई वाक्यांश , मुहावरा या लोकोक्ति का प्रयोग करते हैं तो उसमे संज्ञा या सर्वनाम भी रहता होगा अब इन्ही संज्ञा या सर्वनाम का क्रिया के साथ सम्बन्ध को दर्शाने के लिए वाक्य में जिस विभक्ति चिह्न का प्रयोग किया जाता है वही कारक कहलाता है।
यदि आप दूसरे शब्दों में समझें तो किसी वाक्य में प्रयुक्त संज्ञा या सर्वनाम व अन्य शब्दों के साथ क्रिया के सम्बन्ध को दर्शाने वाले विभक्ति चिह्नों को ही कारक कहा जाता है।
विभक्ति | Case
किसी वाक्य में प्रयुक्त संज्ञा या सर्वनाम शब्दों के साथ जो चिह्न लगाय जाता है उसे ही विभक्ति कहा जाता है। विभक्ति का अन्य नाम भी है जिसे परसर्ग (Postposition) तथा तिर्यक भी कहा जाता है।
कारक के सभी भेदों का अपना अलग अलग विभक्ति चिह्न है। जैसे:- ने,ना, नी, ने,का, के, की, रा, री ,रे, को, से, के द्वारा, के लिए, में, पर, ऐ !, हे !, ओ ! हो, अरे !, अजी ! आदि।
विभक्ति के भेद | Vibhakti ke Bhed
हिंदी व्याकरण में विभक्ति के दो भे माना गया है :
(i) संश्लिष्ट विभक्ति (ii) विश्लिष्ट विभक्ति
संश्लिष्ट विभक्ति | Sanshlisht Vibhakti
क्या आप सोच सकते हैं कि यदि मैंने , आपने , आपको ,तुमने , तुमको , उसने, उसको आदि शब्दों से विभक्ति चिह्न हटा दिया जाये तो क्या वह सर्वनाम शब्द नहीं कहलायेगा बिलकुल सर्वनाम ही कहलायेगा लेकिन इनके साथ विभक्ति चिह्न का प्रयोग करने से भाषा और भी सुन्दर दीखता है।
अब कहा जाए तो जब हम सर्वनाम के साथ जोड़कर विभक्ति चिह्न को लिखते हैं तो उसी को संश्लिष्ट विभक्ति कहा जाता है। सर्वनाम शब्दों के साथ प्रयोग किये गए विभक्ति विकारी बनाता है जो सर्वनाम में ही मिल जाता है। जिसे आप निम्नलिखित उदाहरणों के माध्यम से समझ सकते हैं जैसे – तुम्हारे लिए, तेरे लिए , मेरे लिए ,उसके लिए , आपके लिए आदि
विश्लिष्ट विभक्ति | vishlisht Vibhakti
अब आप विश्लिष्ट विभक्ति में अंतर समझ पाएंगे कि जब आप संज्ञा के साथ विभक्ति चिह्न नहीं लगाकर उससे अलग लिखते हैं तो वही विश्लिष्ट विभक्ति कहलाता है। संज्ञा के साथ प्रयुक्त होने वाले विभक्ति चिह्न स्वतंत्र होता है। जिसे आप निम्नलिखित उदाहरणों के माध्यम से समझ सकते हैं :-
राम ने खाना खाया। श्याम ने राम को गले लगया।
कारक के भेद | Kaarak ke Bhed
हिंदी व्याकरण के अंतर्गत कारक के आठ भेद माना गया है एवं उसके विभक्ति भी अलग – अलग है जो निम्न प्रकार से है :-
कारक के भेद | विभक्ति | परसर्ग / विभक्ति चिह्न | अर्थ |
कर्ता कारक (Nominative case) | प्रथम विभक्ति | ने | कार्य को करने वाले व्यक्ति |
कर्म कारक (Accusative case) | द्वितीय विभक्ति | को | जिस व्यक्ति अथवा वस्तु पर फल का प्रभाव पड़े |
करण कारक (Instrument case) | तृतीय विभक्ति | से ( किसी से जुड़े होने का अर्थ देता है ), के द्वारा | किसी कार्य को सम्पन्न करने वाला साधन |
सम्प्रदान कारक (Dative case) | चतुर्थ विभक्ति | के लिए | जिस उद्देश्य से कार्य कर रहे हैं |
अपादान कारक (Ablative case) | पंचम विभक्ति | से ( अलगाव अथवा मुक्त का अर्थ देता है ) | यह अलगाव तथा तुलना का बोध कराता है |
अधिकरण कारक (Locative case) | षष्ठी विभक्ति | में , पर | जिससे क्रिया का स्थान, समय व् अवसर का बोध हो। |
सम्बन्ध कारक (Gentive case) | सप्तमी विभक्ति | का, के, की, को, रा, री ,रे, | जब दो पदों व् व्यक्तियों के बीच का सम्बन्ध को दर्शाता हो |
सम्बोधन कारक (Vocative case) | सम्बोधन | ऐ !, हे !, हो !,अरे!, अजी ! | जब आप किसी को बुलाते अथवा पुकारते हैं |
कर्ता कारक | Karta Karak
जिस व्यक्ति ( संज्ञा या सर्वनाम ) के द्वारा कार्य को सम्पन्न किया जाता है अर्थात क्रिया को करने वाला व्यक्ति ही कर्ता होता है। जिसका विभक्ति चिह्न ने है। जैसे :- राम ने फल खाया। श्याम खेल रहा है। गीता पढ़ रही है। इस उदाहरण में राम, श्याम, गीता यहाँ कर्ता है।
कर्ता कारक में विभक्ति तीन तरह से प्रयोग किया जाता है :
A. ने परसर्ग से रहित :-
जब कर्ता के साथ ने का प्रयोग नहीं होगा। तब आपके मन में सवाल भी होगा कि हम ने का प्रयोग कहाँ नहीं कर सकते हैं तो आप निम्नलिखित स्थियों के अनुसार समझ सकते हैं :-
A(i) जब कोई कार्य वर्तमान में हो रहा है या फिर भविष्य में होगा आप उस स्थिति में ने का प्रयोग नहीं होता है। जैसे :- राम आम खता है। राम कल दिल्ली जाएगा।
A(ii) जब कोई वाक्य संयुक्त क्रिया को दर्शाता है लेकिन उसके अंतिम खंड में यदि अकर्मक क्रिया है तब भी वहां ने का प्रयोग नहीं होगा। यथा :- राम पढ़कर सो चूका है। वह जा चूका है।
A(iii) अपवाद स्वरूप कुछ भूतकालिक क्रियाएं ही जिसमें ने का प्रयोग नहीं किया जाता है यथा :- चूकना, भूलना, बकना, बोलना, लगना, सकना, लाना, जाना आदि। उदाहरण के लिए
उसे बोलना पड़ा। वह खा चूक। तुम सामान ले आना। तुम वहां चले जाना आदि ।
B. ने परसर्ग सहित
B (i) जब वाक्य में क्रिया का बोध भूतकालिक हो रहा हो या फिर संयुक्त क्रिया के सकर्म क्रिया का भी बोध तब उस स्थिति में ने का प्रयोग होता होता होता है। जैसे :- राम ने आम खाया। सीता ने रोटी खायी। गीता ने सीता कि पिटाई की।
B (ii) अपने ऊपर में देखा की अकर्मक क्रिया के साथ ने का प्रयोग नहीं होता है परन्तु कुछ शब्द ऐसे हैं जिनके अपवाद स्वरूप विभक्ति का प्रयोग होता है जैसे :- गाना, पढ़ना , नहाना, धोना, छींकना, थूकना आदि। उदाहरण के लिए
उसने पढ़ाई की। उसने गया। तुमने धोई। तुमने लिखा। आपने थूक दिया।
B (iii) जब आप किसी व्यक्ति से कोई काम करवाते हैं अर्थात प्रेरणार्थक क्रिया के साथ ने का प्रयोग किया जाता है। जैसे :
आपने राम को पढ़ाया। आपने मुझे बुलाया।
C. कर्ता कारक के साथ अन्य विभक्तियों का प्रयोग
C.(i) जब वाक्य में किसी विधि (आदेश) क्रिया का प्रयोग हो अथवा सम्भाव्य भूतकाल क्रिया का प्रयोग तब उस स्थिति में ने विभक्ति के स्थान को विभक्ति का प्रयोग होगा। उदाहरण के लिए :
विधि क्रिया :- आपको जाना चाहिए। हमें चलना चाहिए।
सम्भाव्य भूतकालिक क्रिया :- उसको अब तक तो आ जान चाहिए था। तुमको काम करना चाहिए था।
C. (ii) जब कोई वाक्य कर्मवाच्य या भाववाच्य तब वहां ने के स्थान पर से या द्वारा का प्रयोग होगा जिसमें से विभक्ति से बने वाक्य निषेध का अर्थ देगा वहीँ द्वारा विभक्ति से बना वाक्य सकारात्मक का अर्थ बताता है। जैसे :-
मुझसे पढ़ा नहीं जाता। उससे गया नहीं जाता।
मेरे द्वारा लिखा जाता है। उसके द्वारा पुस्तक पढ़ी जाती है।
कर्म कारक | Karm Karak
जिस वाक्य से आपको यह बोध हो की क्रिया तो हो रहा है लेकिन उसका फल अथवा परिणाम कर्ता पर न पड़कर अन्य व्यक्ति अथवा वस्तु ( संज्ञा या सर्वनाम ) पर पड़ रहा है तो उसे कर्म कारक कहा जाता है। जिसका विभक्ति चिह्न को है।
कर्म कारक को पहचाने के लिए आप दो प्रश्न कीजिए क्या और किसे । यदि वाक्य से आपको इनके उत्तर मिल जाता है तो वह कर्म कारक है। जैसे :-राम आम खा रहा है। राम पुस्तक पढ़ रहा है। सीता गीता को पीट रही है।
( राम क्या खा रहा है ?, राम क्या कर रहा है ?, सीता किसको पीट रही है ? अब उदाहरण को जरा देखिये क्या इन प्रश्नों का उत्तर आपको मिल रहा है। )
कर्म कारक (को) का प्रयोग
(i) निर्जीव वस्तुओं के साथ कर्म कारक का प्रयोग नहीं होता है। इसे उदाहरण के माध्यम से समझें :-
राम पुस्तक पढ़ रहा है। राम ने कुर्सी तोड़ दी। (प्रयुक्त उदाहरणों में पुस्तक , कुर्सी निर्जीव वस्तु है।)
(ii) सजीव के साथ कर्म कारक का प्रयोग किया जाता है। सजीव के साथ वाक्य में किसे , किसको प्रश्न लगाकर उत्तर ढूँढना है। जिसे आप उदाहरणों के माध्यम से समझ सकते है :-
राम ने श्याम को मारा। माँ ने बच्चे को सुलाया। पुलिस ने चोर को पकड़ा। ( प्रयुक्त उदाहरणों में श्याम, बच्चे, चोर सजीव है। अब प्रश्नों को देखिये किसको मारा, किसको सुलाया, किसको पकड़ा )
(iii) दिन, तिथि को बताने के लिए भी कर्म कारक का प्रयोग किया जाता है। जैसे :-
पिता जी बुधवार को आएंगे। १ मई को मजदुर दिवस मनाया जाता जाता है।
(iv) जब वाक्य में विशेषण शब्द का प्रयोग संज्ञा के रूप में किया जाये तो उस स्थिति में भी कर्म कारक का प्रयोग किया जाता है। जैसे :-
सच्चाई को छिपाया नहीं जा सकता है। ईमानदारों को अक्सर कठिनाई का सामना करना पड़ता है। बड़ों को आदर दो , छोटों को प्यार। भूखे को भोजन देना चाहिए। ( प्रयुक्त उदहारणों में सच्चाई, ईमानदार, भूखा, बड़े – छोटे विशेषण है।
(v) कभी कभी कर्ता अपनी कर्तृ शक्ति को विशेष रूप से अथवा जोर देकर जताने के लिए भी कर्म कारक का प्रयोग करता है।
जैसे :- मैंने ही बच्चों को निर्देश दिया। मैंने ही आपको बुलाया।
(vi) आपने मारना और शिकार करना शब्द सुना ही होगा तो क्या आप दोनों में ही कर्म कारक का प्रयोगकर सकते हैं , बिलकुल नहीं। आइये उदाहरण के माध्यम से समझें :-
जैसे :- चोर ने पुलिस को मारा। राम ने छोटू को मारा। (प्रयुक्त उदाहरणों में मारने से पीटने का अर्थ बोध हो इसलिए यहाँ को विभक्ति का प्रयोग किया गया है। )
मछुआरे ने मछली मारा। शिकारी ने मारा। (प्रयुक्त उदाहरणों में मारने से शिकार का अर्थ बोध हो रहा है इसलिए यहाँ को विभक्ति का प्रयोग नहीं किया गया है। )
करण कारक | Karan Karak
करण कारकआप उपर्युक्त टेबल के माध्यम से समझ ही चुके हैं की जिसमें कारक की विभक्ति के साथ उसका अर्थ भी दिया हुआ है। करण का अर्थ है – साधन अथवा माध्यम।
जिस प्रकार आप अपने दिनचर्या को पूरा करने के लिए किसी साधन अथवा माध्यम का प्रयोग करते हैं ठीक उसी प्रकार जब वाक्य में कर्ता (संज्ञा अथवा सर्वनाम ) किसी कार्य का सम्पादन करने के लिए जिस साधन अथवा माध्यम का प्रयोग करता है उसे ही करण कारक कहा जाता है।
करण कारक जिसकी विभक्ति से , के द्वारा है जिसे आपने उपर्युक्त टेबल में भी देखा। करण कारक चिह्न से जुड़े होने के अर्थ में प्रयुक्त होता है जो हिंदी व्याकरण में अधिक प्रचलित है।
परन्तु हिंदी व्याकरण में करण कारक के अन्य विभक्तियों भी हैं जो इस प्रकार है :- से, द्वारा, के द्वारा, के जरिए, के साथ, के बिना इत्यादि। इसे उदाहरणों के माध्यम से और बेहतर समझें।
जैसे :- वह ट्रैन से आयी। वह कलम से लिखती है। आपसे काम हो जाएगा। मुझसे काम नहीं होगा।
( प्रयुक्त उदाहरण में ट्रैन , कलम , आप , मैं साधन हैं क्योंकि इनके माध्यम से कार्य सम्पन्न हो रहा है।)
जब किसी व्यक्ति के साथ मिलकर कोई काम करते हैं तो वहां के साथ विभक्ति का प्रयोग होगा। जैसे :- राम के साथ श्याम बाजार गया। सीता के साथ गीता कॉलेज गयी।
सम्प्रदान कारक
सम्प्रदान जिसका शाब्दिक अर्थ होता है ‘देना’। अतः जब वाक्य में कर्ता द्वारा किया गया कार्य के पीछे कुछ न कुछ उद्देश्य छिपा हुआ हो विशेषकर किसी को कुछ देने अथवा किसी के लिए कुछ करने का भाव निहित हो तब वहां सम्प्रदान कारक होगा।
‘के वास्ते, ‘ के हित’, ‘के हेतु’, ‘के निमित’ सम्प्रदान कारक की विभक्ति ‘के लिए’ के रूप में प्रयोग किया जाता है। परन्तु कभी – कभी कर्म कारक की विभक्ति ‘को’ का भी प्रयोग सम्प्रदान कारक ‘के वास्ते, ‘ के हित’, ‘के हेतु’, ‘के निमित’ सम्प्रदान कारक की विभक्ति ‘के लिए’ के रूप में प्रयोग किया जाता है।
जैसे :- मजदुर को मजदूरी दो। बच्चे को पुस्तक दो। माता के लिए भोजन लाओ। स्वास्थ्य के वास्ते योग करो। राम ने श्याम के हित में काम किया।
( प्रयुक्त उदाहरण में कर्ता द्वारा देने का देने का भाव निहित है। जैसे :- स्वस्थ्य के वास्ते अर्थात स्वास्थ्य के लिए योग करना चाहिए, राम के भलाई के लिए श्याम ने काम किया। )
सम्प्रदान कारक के विभक्ति के प्रयोग का नियम :
(i) जब कर्ता द्वारा किसी व्यक्ति को कुछ दिया जाता है। जैसे :- रमेश के लिए फल लाओ। जरूरतमंदों को भोजन दो। रोहन के वास्ते खिलौने लाओ।
(ii) जब अवधि के माध्यम से द्वारा किसी को निर्देश दिया जाता है ; जैसे :- वह दो दिनों के लिए बाहर जा रहा है। मुझे एक दिन के लिए पुस्तक चाहिए।
(iii) जब वाक्य में किसी की इच्छा अथवा मांग का अर्थ बोध हो रहा अर्थात जब आप कहते हैं की मुझे चाहिए , उसको चाहिए , उसके लिए चाहिए तब उस स्थिति में भी सम्प्रदान कारक के विभक्ति चिह्न का प्रयोग होगा। जैसे :- बच्चों के लिए पुस्तक चाहिए। रोहन के लिए घडी चाहिए। अपने लिए भोजन चाहिए।
अपदान कारक
जिस वाक्य से संज्ञा या सर्वनाम का किसी दूसरे वस्तु से पृथक्क अथवा अलग होने का अर्थ प्रतीति हो तब वह अपादान कारक कहलायेगा। अपदान कारक का विभक्ति चिह्न से है। जैसे :-
पेड़ से पत्ते गिर रहे हैं। बच्चा छत से कूद गया। राम श्याम से लम्बा है। सीता गीता से सुन्दर है। ( आप प्रयुक्त उदाहरण के माध्यम से समझ पा रहे होंगे कि वस्तु अथवा व्यक्ति के अलग होने का भाव बोध हो रहा है। )
अपदान कारक के प्रयोग का नियम
जब वाक्य में एक वस्तु अथवा व्यक्ति का दूसरे वस्तु अथवा व्यक्ति से पृथक्क होने के अतिरिक्त यदि कोई अन्य भाव ( तुलना, डरना, शर्माना, लजाना, प्रवाहित होना, हटना,छिपना, आलस्य करना आदि। ) का अर्थ प्रतीति हो रहा हो तब उस स्थिति में अपदान कारक का प्रयोग होता है। जैसे :-
राम श्याम से सुन्दर है। सीता गीता से लम्बी है। (प्रयुक्त उदाहरण में तुलना का भाव है।
चोर पुलिस से डरता है। इंसान शेर से डरता है। ( डर का भाव बोध हो रहा है। )
बच्चा बड़ों से शर्माता है। रमा अपने दोस्तों से शर्माती है। ( शर्माने का भाव है। )
अधिकरण कारक
अधिकरण कारक जिसमे अधिकरण का शाब्दिक अर्थ आधार व् आश्रय है। अर्थात जिस वाक्य से संज्ञा या सर्वनाम का स्थान व् काल ,भीतर, अंदर, ऊपर, बीच आदि का अर्थ बोध कराया जाये तो उसे अधिकरण कारक कहा जाता है। अधिकरण कारक की विभक्ति चिह्न ‘में’ और ‘पर ‘है। जैसे :- फूलों पर भँवरे हैं। दूध में मक्खी पड़ा है।
समय को सूचित करने के अर्थ में भी अधिकरण कारक का प्रयोग किया जाता है। जैसे :- आधे घंटे में भोजन किया जायेगा।
सम्बोधन कारक
जब किसी वाक्य में करता दवरा किसी को बुलाने, पुकारने अथवा आवाज लगाने के क्रम में जिस शब्द चिह्न का प्रयोग किया जाता है उसे ही सम्बोधन कारक कहा जाता है। सम्बोधन कारक के रूप में शब्दों के साथ विस्मयादि बोधक चिह्न (!) का प्रयोग किया जाता है। सम्बोधन कारक का विभक्ति चिह्न अजी, हे, अरे आदि है।
उदाहरण के लिए :- हे भगवान ! ऐसा क्यों हुआ ? अरे! यह तो बहुत बड़ा है। अरे ! आप आए गए। छी छी ! कितनी गंदगी है। वाह ! कितना सुन्दर दृश्य है। हाय ! उसका सारा धन चोरों ने लूट लिया।
उत्तर. किसी वाक्य में प्रयुक्त संज्ञा या सर्वनाम व अन्य शब्दों के साथ क्रिया के सम्बन्ध को दर्शाने वाले विभक्ति चिह्नों को कारक कहा जाता है। जैसे :- राम ने रावण को मारा। नितीश ने नीरज को पीटा। निशु ने खाना पकाया। माता जी बाजार से सामान लायी।
उत्तर. हिंदी व्याकरण के अंतर्गत कारक के आठ भेद माना गया है जो निम्नलिखित है :-
कर्ता कारक (Nominative case)
कर्म कारक (Accusative case)
करण कारक (Instrument case)
सम्प्रदान कारक (Dative case)
अपादान कारक (Ablative case)
अधिकरण कारक (Locative case)
सम्बन्ध कारक (Gentive case)
सम्बोधन कारक (Vocative case)
निष्कर्ष :— आज के आलेख में आपने क्या सीखा तो मैं आप सबको बताते चलूँ कि इस आलेख के अंतर्गत आपने कारक का अर्थ , परिभाषा, भेद एवं कारक को पचानने का नियम सीखा । आज का आलेख आपलोगों को कैसा लगा इसके लिए आप हमारे लिए अपने बहुमूल्य टिप्पणी छोड़ सकते हैं जिससे हम आपके लिए आपके रुचिगत टॉपिक को लेकर आएं।
Thanks…आपने बहुत ही अच्छे से कारक को समझाया है,