सुनो द्रोपदी शस्त्र उठालो, अब गोविंद ना आयंगे (कविता)

छोडो मेहँदी खडक संभालो खुद ही अपना चीर बचा लो द्यूत बिछाये बैठे शकुनि, मस्तक सब बिक जायेंगे सुनो द्रोपदी शस्त्र उठालो, अब गोविंद ना आयेंगे| कब तक आस लगाओगी तुम, बिक़े हुए अखबारों से, कैसी रक्षा मांग रही हो दुशासन दरबारों से| स्वयं जो लज्जा हीन पड़े हैं वे क्या लाज बचायेंगे सुनो द्रोपदी … Read more

कभी सोचा है आपने पिता-पुत्र के अनोखे रिश्ते के बारे में?

भारतीय पिता पुत्र की जोड़ी भी बड़ी कमाल की जोड़ी होती है । दुनिया के किसी भी सम्बन्ध में, अगर सबसे कम बोल-चाल है, तो वो है पिता-पुत्र की जोड़ी में । घर में दोनों अंजान से होते हैं, एक दूसरे के बहुत कम बात करते हैं, कोशिश भर एक दूसरे से पर्याप्त दूरी ही … Read more